इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“काय-चिकित्सा” आयुर्वेद के आठ प्रमुख अंगों (अष्टांग आयुर्वेद) में से सबसे महत्वपूर्ण शाखा है, जो आधुनिक चिकित्सा के ‘इंटरनल मेडिसिन’ (Internal Medicine) के समकक्ष है। ‘काय’ का अर्थ है ‘शरीर’। यह पुस्तक इसी विषय पर एक ग्रंथ या पाठ्यपुस्तक है। इसमें विभिन्न रोगों, जैसे- ज्वर (बुखार), अतिसार (दस्त), और पांडु (एनीमिया), के कारण (निदान), लक्षण (रूप), और उनकी विस्तृत चिकित्सा (औषधि और उपचार) का वर्णन किया गया है। इसमें शरीर की क्रिया-प्रणाली और रोगों की विकृति-विज्ञान (pathology) पर भी प्रकाश डाला गया होगा। यह आयुर्वेद के छात्रों और चिकित्सकों (वैद्यों) के लिए एक आधारभूत और अनिवार्य ग्रंथ है।
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