इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक स्व-सहायता (self-help) और मनोवैज्ञानिक पुस्तक है, जिसका उद्देश्य पाठकों को अनावश्यक चिंता और तनाव से मुक्त होने में मदद करना है। ‘खामखाँ चिंता’ का अर्थ है व्यर्थ की चिंता करना। इस पुस्तक में चिंता के कारणों, उसके शारीरिक और मानसिक प्रभावों पर प्रकाश डाला गया होगा। साथ ही, इससे निपटने के लिए व्यावहारिक तकनीकें भी सुझाई गई होंगी, जैसे- माइंडफुलनेस (mindfulness), ध्यान, सकारात्मक सोच का अभ्यास, और वर्तमान क्षण में जीने की कला। यह पाठकों को अपनी विचार-प्रक्रिया को समझने और उसे नियंत्रित करने के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका प्रदान करती है, ताकि वे एक शांत और अधिक आनंदपूर्ण जीवन जी सकें।
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