इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
गोहा (या जुहा/नसरुद्दीन) मध्य-पूर्वी लोक-कथाओं का एक प्रसिद्ध और प्रिय पात्र है, जो एक ‘बुद्धिमान मूर्ख’ है। वह ऐसे कार्य करता है जो पहली नज़र में मूर्खतापूर्ण लगते हैं, लेकिन उनमें अक्सर गहरा ज्ञान या सामाजिक व्यवहार पर एक तीखा व्यंग्य छिपा होता है। यह पुस्तक गोहा के छोटे-छोटे किस्सों का एक संग्रह हो सकती है। एक कहानी में, वह शायद अपनी खोई हुई चाबी को वहाँ खोजता है जहाँ रोशनी है, न कि जहाँ वह खोई थी। ये कहानियाँ पाठकों को हंसाती हैं और साथ ही उन्हें पारंपरिक ज्ञान और तर्क पर सवाल उठाने के लिए मजबूर करती हैं।
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