इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक क्लासिक बोध-कथा है, जो ‘धोखेबाज’ या ‘गद्दार’ बिल्ली के बारे में है। कहानी शायद उन चूहों या पक्षियों के बारे में है जो एक बूढ़ी और कमजोर दिखने वाली बिल्ली पर दया करते हैं। बिल्ली शायद बीमार होने का नाटक करती है या यह वादा करती है कि वह उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुँचाएगी। जब वे उस पर भरोसा कर लेते हैं, तो वह अपना असली रंग दिखाती है और उन पर हमला कर देती है। यह कहानी यह महत्वपूर्ण सबक सिखाती है कि हमें दुष्ट स्वभाव वालों पर आसानी से विश्वास नहीं करना चाहिए, और बाहरी दिखावा अक्सर धोखा हो सकता है। ‘मददगार’ शब्द शायद शीर्षक में एक व्यंग्य है।
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