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मेंढक, मेंढक ही रहेगा! - Maindak, Maindak hi rahega! - Book
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मेंढक, मेंढक ही रहेगा! – Maindak, Maindak hi rahega! – Book

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पुस्तक विवरण

यह मैक्स वेल्थुइज्स की “मेंढक” (Frog) श्रृंखला की एक और कहानी है। इस कहानी में, मेंढक अपने दोस्तों को देखता है – बत्तख उड़ सकती है, सुअर कीचड़ में लोट सकता है, और खरगोश तेज दौड़ सकता है। वह भी उनकी तरह बनने की कोशिश करता है, लेकिन हर बार असफल होता है और खुद को चोट पहुँचा लेता है। वह बहुत दुखी हो जाता है क्योंकि उसे लगता है कि उसमें कोई विशेष गुण नहीं है। अंत में, उसके दोस्त उसे याद दिलाते हैं कि वह एक बेहतरीन तैराक और एक शानदार जम्पर है। उसे एहसास होता है कि उसे किसी और की तरह बनने की जरूरत नहीं है, और एक ‘मेंढक’ होना ही सबसे अच्छी बात है। यह आत्म-स्वीकृति पर एक शक्तिशाली कहानी है।

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