इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘विकास’ की अवधारणा पर एक सरल और आलोचनात्मक टिप्पणी है, जिसे एक ‘गाड़ी’ के रूपम में प्रस्तुत किया गया है। यह दिखाती है कि कैसे विकास की तथाकथित गाड़ी अक्सर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है और समाज में असमानता पैदा करती है, जिसमें कुछ लोग तो गाड़ी में आराम से बैठते हैं जबकि बहुत से लोग पीछे छूट जाते हैं। यह एक सरल लेकिन शक्तिशाली संदेश देती है कि हमें विकास के मॉडल पर पुनर्विचार करने और इसे अधिक टिकाऊ और न्यायसंगत बनाने की आवश्यकता है।
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