इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘सभा या परिषद की आवश्यकता’ पर एक विचारोत्तेजक लेख या निबंध है। इसमें लेखक तर्क देता है कि किसी भी समुदाय या संगठन के सफल संचालन, निर्णय लेने, और विवादों को सुलझाने के लिए एक संगठित ‘सभा’ या ‘परिषद’ का होना क्यों आवश्यक है। आत्माराम जी महाराज (विजयानन्द सूरि) द्वारा लिखित होने के कारण, यह संभवतः जैन संघ के संदर्भ में एक संगठित नेतृत्व और विचार-विमर्श के महत्व पर जोर देती है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।