इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘असवर्ण विवाह’ यानी भिन्न जातियों के बीच विवाह के ‘निषेध’ के पक्ष में लिखी गई एक सामाजिक और पारंपरिक विचारों वाली कृति है। इसमें शास्त्रों और सामाजिक परंपराओं का हवाला देते हुए यह तर्क दिया गया हो सकता है कि अपनी जाति के भीतर ही विवाह करना क्यों उचित है। यह कृति उस दौर की सामाजिक सोच को दर्शाती है जो जाति-व्यवस्था को बनाए रखने पर जोर देती थी। यह सामाजिक इतिहास और जाति-प्रथा पर बहस को समझने के लिए एक दस्तावेज़ के रूप में देखी जा सकती है।
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