इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक विद्वत्तापूर्ण ग्रंथ है जो भारतीय स्थापत्य और मूर्ति-कला के दो महत्वपूर्ण शास्त्रों – “वास्तु-शास्त्र” और “प्रतिमा-विज्ञान” (Iconography) – का संयुक्त अध्ययन प्रस्तुत करता है। ‘वास्तु-शास्त्र’ मंदिरों, भवनों और नगरों के निर्माण के सिद्धांतों से संबंधित है, जबकि ‘प्रतिमा-विज्ञान’ देवी-देवताओं की मूर्तियों के निर्माण, उनके लक्षणों, मुद्राओं, और प्रतीकों के नियमों का विवेचन करता है। इस पुस्तक में इन दोनों शास्त्रों के बीच के गहरे संबंध को उजागर किया गया होगा, कि कैसे मंदिर का वास्तु और उसमें स्थापित प्रतिमा एक-दूसरे के पूरक हैं। यह भारतीय कला, धर्म और वास्तुकला के अध्येताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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