इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
चंदामामा’ भारत की एक प्रतिष्ठित बाल पत्रिका का जुलाई 1985 का अंक है। यह अंक बच्चों के मनोरंजन और ज्ञानवर्धन के लिए विविध सामग्री प्रस्तुत करता है। इसमें भारतीय पौराणिक कथाओं और लोककथाओं पर आधारित चित्र-कथाएं, विक्रम और बेताल की प्रसिद्ध शृंखला, दुनिया भर की कहानियाँ, और सामान्य ज्ञान से जुड़े लेख शामिल होंगे। ‘चंदामामा’ की सरल भाषा और आकर्षक चित्रकला ने इसे दशकों तक बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाए रखा और भारतीय संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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