इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
ग्राम स्वराज्य’ महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित एक सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक दर्शन पर आधारित कृति है। गांधीजी का मानना था कि सच्चा स्वराज्य (आत्म-शासन) दिल्ली में केंद्रित सत्ता से नहीं, बल्कि प्रत्येक गाँव के आत्मनिर्भर और स्व-शासित होने से आएगा। इस पुस्तक में उनके उन विचारों का संकलन है जिनमें वे एक ऐसे आदर्श गाँव की कल्पना करते हैं जो अपनी आवश्यकताओं के लिए आत्मनिर्भर हो, जहाँ निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाएं, और जहाँ सामाजिक समानता और आर्थिक न्याय हो। यह विकेंद्रीकृत शासन और सतत विकास का एक शक्तिशाली मॉडल प्रस्तुत करता है।
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