इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक भारतीय समाज की सबसे जटिल और विवादास्पद समस्याओं में से एक ‘जाति भेद’ पर एक आलोचनात्मक और सुधारवादी कृति है। इसमें जाति-प्रथा की उत्पत्ति, उसके कारण समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव, और छुआछूत जैसी अमानवीय प्रथाओं का विश्लेषण किया गया है। लेखक ने सामाजिक समानता और बंधुत्व पर जोर देते हुए जाति-भेद को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया है। यह सामाजिक चिंतन और सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।
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