इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक काव्यात्मक और कल्पनाशील बाल-कहानी है, जो रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कविता से प्रेरित हो सकती है। कहानी एक बच्चे के बारे में है जो ‘कागज की नावें’ बनाकर उन्हें पानी में बहाता है। प्रत्येक नाव में, वह शायद एक फूल या अपना नाम लिखकर एक संदेश भेजता है, और यह कल्पना करता है कि उसकी नावें दूर-दराज के किन देशों में पहुँचेंगी और किन अजनबी लोगों से मिलेंगी। यह कहानी बचपन की मासूमियत, कल्पना की उड़ान, और दुनिया से जुड़ने की एक सरल लेकिन गहरी इच्छा का एक सुंदर और चिंतनशील चित्रण है।
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