इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक हास्यपूर्ण और शिक्षाप्रद बोध-कथा है, जो संभवतः ईसप की कहानी “मेंढक जो एक राजा चाहते थे” पर आधारित है। कहानी एक तालाब के मेंढकों की है जो अपने नेताहीन जीवन से ऊब गए हैं और देवताओं से एक राजा मांगते हैं। देवता उनके ऊपर एक शांत और गतिहीन ‘लट्ठ’ फेंक देते हैं। शुरुआत में मेंढक उससे डरते हैं, लेकिन जल्द ही वे उस पर कूदने और खेलने लगते हैं और उसकी उपेक्षा करते हैं। फिर वे एक ‘असली’ राजा की मांग करते हैं, और इस बार देवता एक सारस भेजते हैं जो उन्हें एक-एक करके खाना शुरू कर देता है। यह कहानी सिखाती है कि हमें जो मिला है उसमें संतोष करना चाहिए।
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