इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“लीलावती” 12वीं शताब्दी के महान भारतीय गणितज्ञ भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा रचित उनके प्रसिद्ध ग्रंथ “सिद्धान्त शिरोमणि” का एक भाग है। यह ग्रंथ अंकगणित (Arithmetic) और ज्यामिति (Geometry) पर केंद्रित है। इसकी सबसे अनूठी विशेषता यह है कि इसमें गणित के जटिल सवालों को उनकी पुत्री ‘लीलावती’ को संबोधित करते हुए, काव्यात्मक और मनोरंजक पहेलियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक गणित जैसे शुष्क विषय को भी सरस और आकर्षक बना देती है। इसमें संख्या-पद्धति, भिन्न, ब्याज, और क्षेत्रमिति जैसे विषयों की विस्तृत चर्चा है। यह प्राचीन भारत की उन्नत गणितीय परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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