इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह आयुर्वेद की ‘रसशास्त्र’ शाखा पर एक उन्नत ग्रंथ का दूसरा खंड है। ‘रसतंत्रसार’ का अर्थ है रसशास्त्र का सार, जिसमें पारे और अन्य धातुओं, खनिजों को शुद्ध करके औषधि बनाने की विधियों का वर्णन है। ‘सिद्ध प्रयोग संग्रह’ का अर्थ है अनुभूत और सिद्ध हो चुके नुस्खों का संग्रह। यह ग्रंथ आयुर्वेदिक चिकित्सकों और शोधकर्ताओं के लिए विभिन्न रोगों के उपचार हेतु शक्तिशाली औषधियाँ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रैक्टिकल हैंडबुक है।
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