इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह बच्चों की प्रसिद्ध पत्रिका “चंदामामा” का संस्कृत संस्करण है, और यह उसका फरवरी 1992 का अंक है। “चंदामामा” को उसकी पौराणिक और लोक कथाओं के लिए जाना जाता था, और संस्कृत में इसका प्रकाशन भाषा को बच्चों के बीच लोकप्रिय और सुलभ बनाने का एक अनूठा प्रयास था। इस अंक में भारतीय कथाओं, जैसे- विक्रम-बेताल या पंचतंत्र की कहानियों, को सरल संस्कृत गद्य में, सुंदर चित्रों के साथ प्रस्तुत किया गया होगा। इसका उद्देश्य बच्चों को खेल-खेल में और कहानी के माध्यम से संस्कृत भाषा के प्रति रुचि जगाना और उन्हें इस प्राचीन भाषा के प्रारंभिक ज्ञान से परिचित कराना था।
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