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शालिग्रामनिघण्ठटुभूषणम् अर्थात बहुन्निघण्टुरत्नाकरान्तर्गतो भाग -७ - Shaligramanighanthatubhusanam athart Bahunnighanturatnakaragrato bhag-7 - Book
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शालिग्रामनिघण्ठटुभूषणम् अर्थात बहुन्निघण्टुरत्नाकरान्तर्गतो भाग -७ – Shaligramanighanthatubhusanam athart Bahunnighanturatnakaragrato bhag-7 – Book

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पुस्तक सार

यह आयुर्वेद के द्रव्यगुण-विज्ञान पर एक विशाल और महत्वपूर्ण ग्रंथ का सातवाँ भाग है। इसका मुख्य शीर्षक “शालिग्रामनिघण्टुभूषणम्” है, और यह “बहुन्निघण्टुरत्नाकर” नामक एक बड़े संग्रह का हिस्सा है। ‘निघंटु’ आयुर्वेद में उन कोशों को कहते हैं जिनमें औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों, खनिजों और पशु-उत्पादों के नाम, उनके गुण, और उनके उपयोगों का वर्णन होता है। यह ग्रंथ विभिन्न निघंटुओं का एक सार-संग्रह (‘रत्नाकर’) है, जिसे ‘भूषण’ (आभूषण) के रूप में और अधिक अलंकृत और व्यवस्थित किया गया है। यह वैद्यों और आयुर्वेद के शोधकर्ताओं के लिए एक अमूल्य संदर्भ-ग्रंथ है।

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