Samaveda (सामवेद)
सामवेद’ चार वेदों में से तीसरा है और इसे भारतीय संगीत का मूल स्रोत माना जाता है। इसमें ऋग्वेद की उन ऋचाओं का संग्रह है जिन्हें यज्ञ के समय एक विशेष लय और सुर में गाया जाता था। ‘साम’ का अर्थ ही ‘गान’ है। यह हमें बताता है कि ध्वनि और संगीत का आध्यात्मिक महत्व कितना गहरा है। इस श्रेणी की पुस्तकें आपको सामवेद के मंत्रों और सामगान की परंपरा से परिचित कराएंगी। यह उन लोगों के लिए है जो ज्ञान के साथ-साथ नाद-ब्रह्म की साधना में रुचि रखते हैं।
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