इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“विधिविवेकः” पूर्व मीमांसा दर्शन के प्रकांड विद्वान मंडन मिश्र द्वारा रचित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गूढ़ ग्रंथ है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसमें ‘विधि’ (वैदिक आदेश या injunctions) के स्वरूप और उसके अर्थ का गहन ‘विवेक’ या विश्लेषण किया गया है। यह ग्रंथ इस प्रश्न की पड़ताल करता है कि वैदिक वाक्यों का वास्तविक तात्पर्य क्या है, वे मनुष्य को कर्म करने के लिए कैसे प्रेरित करते हैं, और उनसे धर्म का ज्ञान कैसे होता है। इसमें शब्द-शक्ति (अभिधा, लक्षणा) और अर्थ-निर्णय के सिद्धांतों पर सूक्ष्म तार्किक विचार-विमर्श है। यह मीमांसा दर्शन के उच्चतर अध्ययन के लिए एक मौलिक कृति मानी जाती है।
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