इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
सांख्यकारिका’ ईश्वरकृष्ण द्वारा रचित ‘सांख्य दर्शन’ का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक ग्रंथ है। सांख्य भारत के छः आस्तिक दर्शनों में से एक है, जो सृष्टि का विकास पुरुष (चेतना) और प्रकृति (पदार्थ) के संयोग से मानता है। इस ग्रंथ में केवल सत्तर ‘कारिकाओं’ (छंदों) में पूरे सांख्य दर्शन के पच्चीस तत्वों का सार प्रस्तुत किया गया है। यह पुस्तक इन मूल कारिकाओं और उनकी व्याख्या को प्रस्तुत करती है, जो दर्शन के विद्यार्थियों के लिए एक आधार-ग्रंथ है।
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