इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक तीन भिन्न राजनीतिक और आर्थिक विचारधाराओं – पूंजीवाद, समाजवाद और राम राज्य – का एक तुलनात्मक और विश्लेषणात्मक अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें लेखक ने पूंजीवाद की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और बाजार-आधारित अर्थव्यवस्था, समाजवाद की सामाजिक समानता और राज्य-नियंत्रित अर्थव्यवस्था, तथा ‘राम राज्य’ की भारतीय अवधारणा, जो धर्म, न्याय और प्रजा के कल्याण पर आधारित है, की विवेचना की होगी। पुस्तक में इन तीनों मॉडलों की शक्तियों और कमजोरियों का मूल्यांकन किया गया होगा और यह探讨 किया गया होगा कि आधुनिक भारत के लिए कौन सा मॉडल सबसे अधिक प्रासंगिक हो सकता है। यह राजनीति विज्ञान और दर्शन में रुचि रखने वालों के लिए एक विचारोत्तेजक कृति है।
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