इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक आर्य समाज के महान नेता, समाज सुधारक, और शिक्षाविद् स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती (पूर्व नाम- मुंशीराम विज) के जीवन और उनके कार्यों पर आधारित एक जीवनी है। स्वामी श्रद्धानंद, स्वामी दयानंद के प्रमुख शिष्यों में से एक थे। इस पुस्तक में उनके एक सफल वकील से संन्यासी बनने की यात्रा, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना (जो वैदिक और आधुनिक शिक्षा के समन्वय का एक अनूठा प्रयोग था), और हिंदू धर्म में शुद्धि आंदोलन चलाने में उनकी साहसिक भूमिका का विस्तार से वर्णन होगा। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधार आंदोलन के एक निडर और दूरदर्शी नायक की प्रेरणादायक गाथा है।
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