इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“तर्कसंग्रह” भारतीय दर्शन की न्याय-वैशेषिक परंपरा में प्रवेश करने के लिए सबसे लोकप्रिय और संक्षिप्त प्रकरण-ग्रंथ है, जिसकी रचना अन्नंभट्ट ने 17वीं शताब्दी में की थी। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, इसमें तर्कशास्त्र (न्याय) और पदार्थ-विज्ञान (वैशेषिक) के सिद्धांतों का ‘संग्रह’ है। इसमें अत्यंत संक्षिप्त और सारगर्भित भाषा में सात पदार्थों (द्रव्य, गुण, कर्म आदि) और सोलह पदार्थों (प्रमाण, प्रमेय आदि) की परिभाषा और उनके भेदों का वर्णन है। अपनी सुबोधता और व्यवस्था के कारण, यह पिछले कई सौ वर्षों से संस्कृत पाठशालाओं में न्याय-दर्शन के शुरुआती छात्रों के लिए एक मानक और अनिवार्य पाठ्यपुस्तक बनी हुई है।
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