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सर्वदर्शन - विमर्श: - Sarva Darshan- Vimarsh - Book
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सर्वदर्शन – विमर्श: – Sarva Darshan- Vimarsh – Book

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पुस्तक सार

“सर्वदर्शन-विमर्श:” भारतीय दर्शन के विभिन्न स्कूलों (दर्शनों) पर एक आलोचनात्मक (‘विमर्श’) अध्ययन है। यह “सर्वदर्शनसंग्रह” की तरह केवल सिद्धांतों का संग्रह नहीं, बल्कि उन पर एक गहन विचार-विमर्श है। इसमें लेखक ने चार्वाक, जैन, बौद्ध से लेकर न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा और वेदांत तक के प्रमुख दर्शनों के मूल सिद्धांतों को प्रस्तुत करने के साथ-साथ, उनकी तार्किक शक्ति, उनकी सीमाओं और उनके बीच के अंतर्संबंधों का मूल्यांकन किया होगा। यह एक तुलनात्मक दर्शन का ग्रंथ है, जो पाठकों को भारतीय दार्शनिक चिंतन की विविधता, समृद्धि और उसकी आंतरिक बहसों को गहराई से समझने में मदद करता है।

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