इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह भारतीय दर्शन का शिखर ग्रंथ है, जिसमें दो कृतियों का संगम है: महर्षि बादरायण द्वारा रचित “ब्रह्मसूत्र” और उस पर अद्वैत वेदांत के प्रणेता आदि शंकराचार्य द्वारा लिखा गया “शारीरिक भाष्य”। ब्रह्मसूत्र, उपनिषदों के दार्शनिक सिद्धांतों को अत्यंत संक्षिप्त और तार्किक सूत्रों में प्रस्तुत करता है। इन गूढ़ सूत्रों का अर्थ शंकराचार्य के भाष्य के बिना समझना लगभग असंभव है। इस भाष्य में, शंकराचार्य ने अकाट्य तर्कों द्वारा ‘अद्वैत’ के सिद्धांत (ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है, और जगत मिथ्या है) को स्थापित किया है और अन्य दार्शनिक मतों का खंडन किया है। यह वेदांत दर्शन का सबसे प्रामाणिक और महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
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