इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“महावंश” (महान वंश) श्रीलंका के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन महाकाव्य है, जो पालि भाषा में लिखा गया है। यह ग्रंथ 5वीं शताब्दी ईस्वी में रचा गया था और इसमें श्रीलंका के राजाओं के वंश, विशेष रूप से अनुराधापुर के राजाओं, का क्रमबद्ध इतिहास वर्णित है। इसका मुख्य केंद्र श्रीलंका में बौद्ध धर्म का आगमन और उसका विकास है, जिसमें सम्राट अशोक के पुत्र महिंद द्वारा बौद्ध धर्म को द्वीप पर लाने की कथा प्रमुख है। यह केवल एक राजवंश का इतिहास नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म और सिंहली राष्ट्र की पहचान के निर्माण की गाथा है। यह दक्षिण एशिया के इतिहास और बौद्ध धर्म के प्रसार को समझने के लिए एक अमूल्य स्रोत है।
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