इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक जैन धर्म के तीन मूल आधारों – देव, शास्त्र, और गुरु – की अवधारणा पर एक परिचयात्मक या विवेचनात्मक कृति है। जैन दर्शन में, ‘देव’ का अर्थ है वीतरागी, सर्वज्ञ और हितोपदेशी अरिहंत और सिद्ध भगवान। ‘शास्त्र’ का अर्थ है उनके द्वारा कथित और गणधरों द्वारा रचित आगम ग्रंथ। और ‘गुरु’ का अर्थ है उन शास्त्रों के ज्ञाता और पंच-महाव्रतों का पालन करने वाले निर्ग्रंथ मुनि। इन तीनों पर सच्ची श्रद्धा रखना ही ‘सम्यक् दर्शन’ कहलाता है, जो मोक्ष मार्ग का पहला सोपान है। यह पुस्तक इन तीनों तत्वों के स्वरूप और मोक्ष-मार्ग में उनके महत्व को विस्तार से समझाती है।
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