इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक 1947 में नॉर्वेजियन अन्वेषक थॉर हेयरडाह्ल द्वारा किए गए प्रसिद्ध “कोन-टिकी” अभियान की सच्ची और रोमांचक कहानी बताती है। हेयरडाह्ल यह सिद्ध करना चाहते थे कि प्राचीन दक्षिण अमेरिकी लोग एक साधारण बेड़ा (raft) का उपयोग करके प्रशांत महासागर को पार कर पोलिनेशियन द्वीपों तक पहुँच सकते थे। उन्होंने प्राचीन डिजाइनों के आधार पर बाल्सा लकड़ी का एक बेड़ा बनाया, जिसका नाम उन्होंने “कोन-टिकी” रखा, और अपने पांच साथियों के साथ पेरू से 101 दिनों की एक खतरनाक यात्रा पर निकल पड़े। यह पुस्तक उनके इस ‘नामुमकिन सफर’ के दौरान हुए संघर्षों, तूफानों और अंततः उनकी सफलता की साहसिक गाथा है।
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