इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक बहुत ही प्रसिद्ध और मार्मिक लोक-कथा है जो हमें अपने बड़ों का सम्मान करने की शिक्षा देती है। कहानी एक ऐसे परिवार की है जहाँ एक बूढ़े दादाजी के हाथ कांपने के कारण उनसे अक्सर खाना गिर जाता है। उनका बेटा और बहू तंग आकर उन्हें एक कोने में एक ‘लकड़ी का कटोरा’ दे देते हैं ताकि वे कीमती बर्तन न तोड़ें। एक दिन, वे अपने छोटे बेटे को लकड़ी के एक टुकड़े से कुछ बनाते हुए देखते हैं। पूछने पर, बच्चा मासूमियत से जवाब देता है, “मैं आपके लिए एक लकड़ी का कटोरा बना रहा हूँ, ताकि जब आप बूढ़े हो जाएं, तो मैं आपको इसमें खाना दे सकूं”। यह सुनकर माता-पिता को अपनी गलती का एहसास होता है।
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