इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक आचार्य कुन्दकुन्द द्वारा रचित महान जैन ग्रंथ ‘प्रवचनसार’ पर दिए गए प्रवचनों का आठवाँ खंड है। ‘प्रवचनसार’ ज्ञान, ज्ञेय और चारित्र का वर्णन करने वाला एक गहन आध्यात्मिक ग्रंथ है। यह प्रवचन श्रृंखला किसी प्रख्यात जैन विद्वान द्वारा दी गई है, जो मूल गाथाओं के अर्थ को सरल और समकालीन भाषा में समझाते हैं। यह खंड प्रवचनसार के किसी विशिष्ट अधिकार या अध्याय पर केंद्रित हो सकता है, जो स्वाध्याय करने वालों को ग्रंथ के मर्म को समझने में मदद करता है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।