इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
श्री आनंदभाष्यम्’ वेदांत के एक विशिष्ट वैष्णव संप्रदाय, संभवतः निम्बार्क या रामानंदी संप्रदाय का, ब्रह्मसूत्र पर लिखा गया एक भाष्य (commentary) है। ‘भाष्य’ मूल सूत्रों की विस्तृत और आधिकारिक व्याख्या होती है। यह भाष्य अपने संप्रदाय के दार्शनिक दृष्टिकोण (जैसे द्वैताद्वैत) के अनुसार ब्रह्म, जीव और जगत के संबंध को स्थापित करता है। यह वेदांत दर्शन के उन्नत छात्रों और उस विशेष वैष्णव परंपरा के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और श्रद्धेय ग्रंथ है।
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