इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महाकवि चंद बरदाई द्वारा रचित प्रसिद्ध महाकाव्य ‘पृथ्वीराज रासो’ पर एक आलोचनात्मक और ऐतिहासिक अध्ययन है। यह पुस्तक रासो में वर्णित पात्रों जैसे पृथ्वीराज, संयोगिता, और अन्य की ‘ऐतिहासिकता’ की जांच करती है। इसमें लेखक यह विश्लेषण करता है कि रासो के पात्र और घटनाएँ ऐतिहासिक तथ्यों से कितनी मेल खाती हैं और उनमें कितना काव्यात्मक कल्पना का अंश है। यह इतिहास और साहित्य के बीच के संबंध को समझने का एक गंभीर प्रयास है।
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