इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
नीतिवाक्यामृत’ आचार्य सोमदेव सूरि द्वारा रचित राजनीति और नैतिकता पर एक प्रसिद्ध जैन ग्रंथ है, और यह पुस्तक उसी पर आधारित एक टीका या अनुवाद हो सकती है। ‘नीति के अमृत-वाक्य’ वाले इस ग्रंथ में राजा के कर्तव्यों, शासन-प्रणाली, और एक सफल तथा नैतिक जीवन जीने के सिद्धांतों को सूक्तियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह कृति कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ की तरह ही है, लेकिन इसमें जैन धर्म के अहिंसक और नैतिक दृष्टिकोण का भी समावेश है।
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