इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
आप्तमीमांसा’ आचार्य समंतभद्र द्वारा रचित जैन न्याय का एक fundamental ग्रंथ है, जो सर्वज्ञता और अनेकांतवाद के सिद्धांत को सिद्ध करता है। यह पुस्तक ‘आप्तमीमांसा’ पर लिखी गई ‘तत्वदीपिका’ नामक एक टीका या व्याख्या है। ‘तत्वदीपिका’ का अर्थ है ‘तत्वों पर प्रकाश डालने वाला दीपक’। यह टीका मूल ग्रंथ के जटिल तर्कों और दार्शनिक अवधारणाओं को सरल और स्पष्ट रूप में समझाती है, जिससे यह जैन न्याय के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी बन जाती है।
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