इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘भूदान गंगा’ नामक श्रृंखला का तीसरा खंड है, जो आचार्य विनोबा भावे द्वारा शुरू किए गए ऐतिहासिक ‘भूदान आंदोलन’ का एक विस्तृत दस्तावेजीकरण है। यह आंदोलन भूमिहीनों के लिए भूमिपतियों से भूमि का स्वैच्छिक दान प्राप्त करने पर आधारित था। यह खंड विनोबा जी की पदयात्राओं, उनके प्रवचनों, और इस अहिंसक भूमि सुधार आंदोलन की प्रगति का वर्णन करता है, जिसे वे ‘गंगा’ की तरह पवित्र और प्रवाहमान मानते थे।
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