इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक ऐतिहासिक शोध-ग्रंथ है जो जैन धर्म के महान आचार्य ‘कुन्दकुन्द’ के ‘नाम’ की प्रामाणिकता और उनके ‘समय’ (काल-निर्धारण) की समस्या पर केंद्रित है। आचार्य कुन्दकुन्द के समय को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं। यह पुस्तक विभिन्न साहित्यिक, पुरातात्विक और पारंपरिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर उनके काल को सटीक रूप से निर्धारित करने का एक गंभीर प्रयास है। यह जैन इतिहास के शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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