इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘अध्यात्मयोग’ और ‘चित्त-विकलन’ (मानसिक विघटन या व्याकुलता) के बीच के संबंध पर एक मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक कृति हो सकती है। इसमें यह समझाया गया हो सकता है कि कैसे योग और अध्यात्म की साधना से चित्त की व्याकुलता, तनाव और अन्य मानसिक समस्याओं को दूर किया जा सकता है। यह प्राचीन भारतीय योग-पद्धति को आधुनिक मनोविज्ञान के संदर्भ में प्रस्तुत करने का एक प्रयास हो सकती है, जो मानसिक शांति की तलाश करने वालों के लिए उपयोगी है।
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