इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महापंडित युधिष्ठिर मीमांसक द्वारा रचित ‘संस्कृत व्याकरण शास्त्र के इतिहास’ का पहला भाग है। यह एक monumental और అత్యంత (अत्यंत) प्रामाणिक कृति है जिसमें पाणिని से पहले से लेकर आधुनिक काल तक के हजारों संस्कृत वैयाकरणों और उनके कार्यों का कालक्रमानुसार और विस्तृत विवरण दिया गया है। यह पहला खंड व्याकरण शास्त्र की प्राचीन परंपरा और पाणिनीय युग पर केंद्रित है। यह इस विषय पर एक विश्वकोशीय ग्रंथ है।
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