इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक दिल्ली में हुए एक प्रसिद्ध ‘शास्त्रार्थ’ (धार्मिक और दार्शनिक बहस) का दस्तावेजीकरण करती है। यह संभवतः 19वीं सदी में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती और अन्य धर्मों के विद्वानों के बीच हुए शास्त्रार्थों में से एक का विवरण है। इसमें दोनों पक्षों द्वारा दिए गए तर्कों, प्रमाणों और शास्त्र-उद्धरणों का लेखा-जोखा है। यह उस युग के धार्मिक और बौद्धिक माहौल को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज़ है।
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