इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह 17वीं सदी के महान संस्कृत कवि और साहित्यशास्त्री, पंडितराज जगन्नाथ पर एक विस्तृत और विद्वत्तापूर्ण शोध-ग्रंथ का तीसरा खंड है। इस कृति में उनके जीवन-चरित्र (‘चरित्र’) और उनके कालजयी ग्रंथों (जैसे ‘रसगंगाधर’) की गहन ‘समीक्षा’ प्रस्तुत की गई है। यह संस्कृत साहित्य के उच्च-स्तरीय छात्रों, शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए एक अमूल्य संदर्भ ग्रंथ है, जो पंडितराज की असाधारण प्रतिभा और उनके योगदान को समझने में मदद करता है।
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