इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक वैचारिक और चिंतनपरक ग्रंथ है, जो ‘समाज’ और ‘राज्य’ के बीच के संबंध को प्राचीन ‘भारतीय विचार’ के परिप्रेक्ष्य में विश्लेषित करता है। इसमें धर्मशास्त्रों और नीति-ग्रंथों के आधार पर राजधर्म, दण्डनीति, प्रजा के कर्तव्य और एक आदर्श राज्य की अवधारणा जैसे विषयों का गहन विवेचन किया गया है। यह पुस्तक भारतीय राजनीतिक चिंतन की समृद्ध परंपरा को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कृति है।
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