इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक महाभारत के युद्ध-स्थल ‘कुरुक्षेत्र’ को एक ‘धर्मक्षेत्र’ के रूप में व्याख्यायित करती है। यह केवल एक ऐतिहासिक युद्ध का वर्णन नहीं, बल्कि हर मनुष्य के भीतर चलने वाले धर्म और अधर्म, कर्तव्य और मोह के बीच के शाश्वत संघर्ष का एक प्रतीकात्मक विश्लेषण है। यह श्रीमद्भगवद्गीता के दर्शन के आलोक में जीवन की चुनौतियों का सामना करने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
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