इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन धर्म के मूल और सर्वोपरि सिद्धांत ‘अहिंसा’ की गहन और विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करती है। इसमें अहिंसा की अवधारणा को केवल शारीरिक हिंसा न करने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि मन, वचन और कर्म से किसी भी जीवित प्राणी को कष्ट न पहुँचाने के रूप में समझाया गया है। यह विभिन्न प्रकार के जीवों और उनके प्रति अहिंसक व्यवहार के पालन के तरीकों पर प्रकाश डालती है। यह उन सभी के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन है जो जैन दर्शन और अहिंसा के उच्चतम आदर्श को समझना चाहते हैं।
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