इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
त्रिकदर्शनम्’ कश्मीर शैवमत की एक महत्त्वपूर्ण शाखा, त्रिक दर्शन का परिचय देने वाला ग्रंथ है। ‘त्रिक’ नाम तीन मुख्य सिद्धांतों—शिव (परम चेतना), शक्ति (उसकी ऊर्जा) और नर (व्यक्तिगत आत्मा)—पर आधारित होने के कारण पड़ा है। यह एक अद्वैतवादी दर्शन है जो मानता है कि व्यक्तिगत आत्मा मूल रूप से शिव के साथ एक है, लेकिन अज्ञान के कारण स्वयं को सीमित मानती है। साधना का उद्देश्य इस अज्ञान को दूर कर अपनी वास्तविक शिव-स्वरूपता को पहचानना (प्रत्यभिज्ञा) है। इस ग्रंथ में त्रिक दर्शन के मूल तत्त्वों, सिद्धांतों और साधना पद्धतियों का विवेचन किया गया होगा।
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