इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
भगवत जैन द्वारा रचित यह पुस्तक 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर और उनके बाद जैन धर्म को आगे बढ़ाने वाली आचार्य परंपरा का एक विस्तृत ऐतिहासिक और दार्शनिक अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें भगवान महावीर के प्रमुख गणधरों (जैसे गौतम स्वामी) और उनके बाद के प्रमुख आचार्यों, जैसे भद्रबाहु, कुंदकुंद आदि के जीवन, उनके कार्यों और जैन संघ में उनके योगदान का वर्णन है। तीसरा खंड संभवतः मध्यकालीन या किसी विशिष्ट कालखंड के आचार्यों पर केंद्रित है, जो जैन धर्म के प्रवाह को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है।
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