इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
लालचन्द्र जैन द्वारा लिखित यह पुस्तक जैन दर्शन के केंद्र-बिंदु ‘आत्मा’ की अवधारणा पर एक गहन दार्शनिक विवेचन प्रस्तुत करती है। इसमें आत्मा के स्वरूप, उसके गुण (जैसे चेतना, अनंत सुख), कर्मों के साथ उसका संबंध, उसकी विभिन्न अवस्थाएं (संसारी और मुक्त) और आत्मा की शुद्धि करके मोक्ष प्राप्त करने की प्रक्रिया का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। यह कृति विभिन्न दार्शनिक दृष्टिकोणों का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए जैन दर्शन में आत्मा के अद्वितीय सिद्धांत को स्पष्ट करती है। यह आत्म-जिज्ञासुओं और दार्शनिकों के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
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