इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह न्याय-वैशेषिक दर्शन की नव्य-न्याय शाखा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय ग्रंथ है। इसमें विश्वनाथ पंचानन द्वारा रचित ‘भाषा-परिच्छेद’ (जिसे ‘कारिकावली’ भी कहते हैं) के मूल श्लोक हैं, और उन पर उनकी स्वयं की टीका ‘सिद्धान्त-मुक्तावली’ भी शामिल है। यह ग्रंथ न्याय-वैशेषिक के सोलह पदार्थों और सात श्रेणियों की संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित व्याख्या करता है और भारतीय तर्कशास्त्र में प्रवेश के लिए एक मानक पाठ्यपुस्तक है।
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