इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
राघवेन्द्र विक्रम सिंह का यह शोध ग्रंथ, जो हिंदी में उपलब्ध है, परमार वंश (लगभग 9वीं से 13वीं शताब्दी) के शिलालेखों के आधार पर तत्कालीन सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का पुनर्निर्माण करता है। लेखक ने परमार राजाओं, विशेषकर राजा भोज, के समय के शिलालेखों का अध्ययन कर उस युग की वर्ण-व्यवस्था, शिक्षा, कला, साहित्य, धार्मिक विश्वासों और प्रशासनिक संरचना पर प्रकाश डाला है। यह पुस्तक पुरातात्विक साक्ष्यों का उपयोग करके मध्यकालीन मालवा क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति को समझने के लिए एक प्रामाणिक स्रोत है।
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