इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
सारस्वत कुण्डलिनी महायोग’ योग और तंत्र की एक विशिष्ट साधना पद्धति पर आधारित ग्रंथ है। ‘सारस्वत’ का संबंध ज्ञान और चेतना की देवी सरस्वती से हो सकता है, जो यह दर्शाता है कि यह साधना ज्ञान और मंत्र के माध्यम से कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत करने पर केंद्रित है। इस कृति में कुंडलिनी, चक्रों (ऊर्जा केंद्रों), नाड़ियों (ऊर्जा मार्गों) और उसे जाग्रत करने की विभिन्न तकनीकों जैसे प्राणायाम, मुद्रा, बंध और ध्यान का विस्तृत वर्णन हो सकता है। इसका अंतिम लक्ष्य कुंडलिनी को सहस्रार चक्र तक उठाकर समाधि और आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करना है।
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